Sunday, October 04, 2026

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सनातन सिर्फ “जय श्री राम” नहीं है — घर, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी है

 सनातन सिर्फ “जय श्री राम” नहीं है — घर, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी है

आज पितृपक्ष की मातृ नवमी है।

घर में पितरों का स्मरण हो रहा होगा। कहीं तर्पण हो रहा होगा, कहीं ब्राह्मण भोजन, कहीं गाय को रोटी, कहीं गरीब को भोजन।

और कहीं-कहीं बस WhatsApp Status पर एक फोटो लगी होगी—
“ॐ पितृ देवाय नमः।”

मन में एक सवाल आया...

क्या हमारा धर्म सिर्फ पूजा-पाठ तक रह गया है?

मैं सनातनी हिंदू हूँ। मुझे मंदिर जाना अच्छा लगता है। मुझे मंत्र अच्छे लगते हैं। मुझे भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, महादेव और माँ दुर्गा में आस्था है।

और हाँ, राजनीतिक रूप से मेरा झुकाव भारतीय जनता पार्टी की तरफ है।

लेकिन मैं एक बात बहुत साफ मानता हूँ—

सनातन धर्म को किसी राजनीतिक दल के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

सरकारें आती हैं, जाती हैं। नेता बदलते हैं। चुनाव आते हैं, परिणाम आते हैं।

लेकिन संस्कार और संस्कृति घर से बनती है।



हम सनातन की बात करते हैं, लेकिन सनातन जीते कितने हैं?

हम बड़े गर्व से कहते हैं—

“हमारी 5000 साल पुरानी संस्कृति है।”

बिल्कुल है।

लेकिन अपने ही माता-पिता से बात करने का समय नहीं है।

बच्चों को रामायण की कहानी सुनाने का समय नहीं है।

घर में दादा-दादी बैठे हैं और बच्चे मोबाइल में व्यस्त हैं।

मंदिर में जाकर 11 रुपये चढ़ा देंगे, लेकिन रास्ते में किसी जरूरतमंद को देखकर नजर फेर लेंगे।

गंगा को माँ कहेंगे, फिर उसी नदी में कूड़ा डाल देंगे।

भारत माता की जय बोलेंगे, फिर टैक्स चोरी को “जुगाड़” कह देंगे।

और सबसे मजेदार बात—

सोशल मीडिया पर हम धर्म की रक्षा करने निकल पड़ते हैं, लेकिन अपने घर में धर्म के मूल सिद्धांतों पर ध्यान नहीं देते।

सत्य। संयम। सेवा। कर्तव्य। मर्यादा।

यही तो सनातन है।

मुझे हिंदुत्व चाहिए, लेकिन दिखावे वाला नहीं

मेरे लिए हिंदुत्व का मतलब किसी के प्रति नफरत पैदा करना नहीं है।

मेरे लिए हिंदुत्व का मतलब है—

गलत के खिलाफ खड़ा होना।

सही के साथ खड़ा होना।

कमजोर की मदद करना।

अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाना।

अपनी संस्कृति पर गर्व करना।

अपने देश के प्रति ईमानदार रहना।

और जब अपनी तरफ से गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करने की हिम्मत रखना।

भगवान श्रीराम ने सिर्फ राक्षसों को नहीं हराया था। उन्होंने अपने जीवन में मर्यादा स्थापित की थी।

आज हमें उसी मर्यादा की जरूरत है।

राजनीति भी जरूरी है, लेकिन राजनीति ही सब कुछ नहीं है

मैं BJP के राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी हद तक सहमत हूँ।

मुझे लगता है कि भारत को अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर गर्व करने का अधिकार है।

मुझे अच्छा लगता है जब हमारी सभ्यता, हमारे मंदिर, हमारी परंपराएँ और हमारी विरासत राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बनती हैं।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं हर नेता की हर बात को सही मानूँ।

आस्था आँख बंद करके चलने का नाम नहीं है।

हमारे शास्त्रों ने भी प्रश्न पूछने की परंपरा दी है।

और लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना भी राष्ट्र-विरोध नहीं है।

आज देश में मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस चल रही है। चुनाव आयोग खुद मतदाता सूची को अपडेट करने और SIR जैसे प्रक्रियाओं के माध्यम से रिकॉर्ड सुधारने की व्यवस्था चला रहा है।

मेरी सीधी सोच है—

वोटर लिस्ट साफ होनी चाहिए।

लेकिन प्रक्रिया भी ऐसी होनी चाहिए जिस पर आम नागरिक को भरोसा हो।

सरकार को सवालों का जवाब देना चाहिए।

विपक्ष को भी आरोप लगाने से पहले तथ्य सामने रखने चाहिए।

और जनता को?

जनता को WhatsApp University से बाहर निकलकर तथ्य देखना चाहिए।

क्योंकि लोकतंत्र में सबसे ताकतवर चीज़ न BJP है, न Congress।

सबसे ताकतवर चीज़ जागरूक नागरिक है।

सनातन की लड़ाई बाहर से पहले भीतर की है

हम पूछते रहते हैं—

“हिंदू खतरे में है क्या?”

मेरा जवाब थोड़ा अलग है।

पहले यह पूछिए—

क्या हमारा परिवार मजबूत है?

क्या हमारे बच्चों को अपनी संस्कृति पता है?

क्या उन्हें राम और रावण में सिर्फ युद्ध दिखाई देता है, या चरित्र का फर्क भी समझ आता है?

क्या उन्हें भगवद्गीता का एक भी श्लोक पता है?

क्या उन्हें अपने दादा-दादी की कहानी सुनने में रुचि है?

क्या हमें अपने त्योहारों का अर्थ मालूम है?

क्या हम अपने मंदिर को साफ रखते हैं?

क्या हम अपने आसपास के समाज के प्रति जिम्मेदार हैं?

अगर इन सवालों के जवाब कमजोर हैं, तो केवल नारे लगाने से सनातन मजबूत नहीं होगा।

मुझे ऐसा हिंदू भारत चाहिए…

जहाँ मंदिर भव्य हों, लेकिन स्कूल भी अच्छे हों।

जहाँ धर्म का सम्मान हो, लेकिन कानून का भी सम्मान हो।

जहाँ राम का नाम लिया जाए, तो राम के चरित्र को भी याद रखा जाए।

जहाँ गाय की सेवा की बात हो, तो मनुष्य की सेवा भी हो।

जहाँ राष्ट्रवाद हो, लेकिन राष्ट्र की जिम्मेदारियाँ निभाने का साहस भी हो।

जहाँ युवा Instagram Reel में “सनातनी” लिखने के साथ-साथ अपने माता-पिता के पैर भी छुए।

जहाँ व्यापारी भगवान की पूजा करने के बाद अपने कर्मचारियों का हक न मारे।

जहाँ कर्मचारी ईमानदारी से काम करे।

जहाँ अधिकारी रिश्वत लेने में शर्म महसूस करे।

और जहाँ नेता मंदिर जाए तो अच्छी बात है—
लेकिन जनता के प्रति अपना धर्म निभाए, यह उससे भी बड़ी बात है।

BJP से मेरी अपेक्षा भी यही है

मैं BJP को पसंद करता हूँ।

लेकिन मेरी अपेक्षा किसी भी राजनीतिक दल से सिर्फ यह नहीं है कि वह हिंदू मुद्दों पर बोले।

मेरी अपेक्षा है कि वह सुशासन दे।

रोजगार पर काम करे।

व्यापार आसान बनाए।

भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करे।

न्याय व्यवस्था मजबूत करे।

शिक्षा और स्वास्थ्य बेहतर करे।

और भारत की संस्कृति को सम्मान देते हुए आधुनिक भारत का निर्माण करे।

क्योंकि आखिरकार—

हिंदुत्व का अर्थ सिर्फ अतीत पर गर्व करना नहीं है।

हिंदुत्व का अर्थ ऐसा भविष्य बनाना भी है, जिस पर हमारी आने वाली पीढ़ियाँ गर्व करें।

पितरों को असली श्रद्धांजलि क्या है?

आज पितृपक्ष है।

हम अपने पूर्वजों को याद कर रहे हैं।

लेकिन शायद हमारे पितर हमसे सिर्फ पिंडदान नहीं माँगते होंगे।

वे चाहते होंगे कि उनकी आने वाली पीढ़ी ईमानदार हो।

अपने परिवार को जोड़े।

अपनी संस्कृति को समझे।

अपनी मिट्टी से जुड़ी रहे।

और देश को पहले से थोड़ा बेहतर छोड़कर जाए।

शायद यही सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है।

इसलिए आज मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ—

सनातन को बचाने के लिए हमेशा किसी और से लड़ने की जरूरत नहीं है।

कभी-कभी अपने अंदर के अहंकार से लड़िए।

अपनी लालच से लड़िए।

अपनी आलस्य से लड़िए।

अपने दिखावे से लड़िए।

और अपने कर्तव्य से भागने की आदत से लड़िए।

क्योंकि…

सनातन की सबसे बड़ी ताकत उसका नारा नहीं, उसका आचरण है।

जय श्री राम।
हर हर महादेव।
भारत माता की जय। 🇮🇳🚩


Wednesday, January 07, 2026

AI prompt generation guide

How to Generate Effective AI Prompts: A Beginner’s Guide

Artificial Intelligence tools like ChatGPT, image generators, and automation platforms are only as powerful as the prompts you give them. If you’ve ever felt that AI responses were too generic, inaccurate, or confusing, the real issue is often how the prompt was written.

In this blog, you’ll learn what an AI prompt is, why it matters, and how to generate high-quality AI prompts that deliver accurate and useful results.


What Is an AI Prompt?
AI prompt generation guide

An AI prompt is an instruction or input you give to an AI system to guide its response.
It can be:

  • A question

  • A command

  • A role assignment

  • A detailed scenario

Example:

❌ “Write about marketing”
✅ “Write a 500-word beginner-friendly article on digital marketing for small businesses in India.”

The second prompt gives clarity, context, and expectations—resulting in a much better output.


AI prompt generation guide

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Why Prompt Quality Matters

Good prompts help AI:

  • Understand your goal

  • Match the tone and style

  • Deliver accurate and relevant content

  • Save time by reducing repeated corrections

Think of AI like a highly skilled assistant—it performs best when instructions are clear.

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The 5-Step Formula to Generate Powerful AI Prompts

1. Be Clear About Your Objective

Start with what you want.

Ask yourself:

  • Do I want content, code, ideas, or analysis?

  • Who is the target audience?

Example:
“Generate Instagram captions” is vague.
“Generate 10 Instagram captions for a yoga coach targeting beginners” is clear.


2. Provide Context

Context helps AI tailor its response.

Include:

  • Industry or domain

  • Platform (blog, LinkedIn, YouTube, email)

  • Skill level (beginner, intermediate, expert)

Example:
“Explain blockchain to a non-technical audience using simple language.”


3. Define the Output Format

Tell AI how you want the answer.

Formats can be:

  • Bullet points

  • Step-by-step guide

  • Table

  • Blog article

  • Script or dialogue

Example:
“Create a step-by-step checklist in bullet points.”


4. Specify Tone and Style

AI can write in many styles—tell it which one you want.

Common tones:

  • Professional

  • Friendly

  • Conversational

  • Persuasive

  • Academic

Example:
“Write in a friendly and conversational tone suitable for a blog.”


5. Add Constraints (Optional but Powerful)

Constraints improve precision.

You can specify:

  • Word count

  • Language

  • Region

  • Do’s and Don’ts

Example:
“Limit the response to 300 words and avoid technical jargon.”


Example of a Strong AI Prompt

“Write an 800-word SEO-friendly blog post on ‘How to Save Income Tax in India’ for salaried employees. Use simple language, include subheadings, and write in a professional but friendly tone.”

This single prompt already answers:

  • What to write

  • For whom

  • How long

  • How it should sound


Common Mistakes to Avoid

  • ❌ Being too vague

  • ❌ Giving multiple unrelated instructions in one prompt

  • ❌ Not specifying audience or tone

  • ❌ Expecting perfection without refinement

Remember: Prompting is iterative. Improve prompts based on results.


Pro Tip: Treat Prompting Like a Conversation

You don’t need a perfect prompt every time. Start simple, review the output, then refine:

  • “Make it shorter”

  • “Rewrite in simpler language”

  • “Add examples”

  • “Focus only on beginners”

AI works best when guided step by step.


Final Thoughts

Learning how to generate AI prompts is a must-have skill in today’s digital world. Whether you’re a blogger, marketer, student, or business owner, mastering prompt writing helps you unlock the real power of AI tools.

Start practicing today—better prompts lead to better results.




Friday, January 13, 2023

Work Anniversary in Jolly Healthcare



 

11th of January is a memorable day for me in Jolly Healthcare.    This year on 11th January, I have completed my #3 years in Jolly Family 😇. I begin my journey in this company by traveling from Ghaziabad (Uttar Pradesh) in the midnight of 10th January 2020 along with my small family to join this large Jolly Family in Jaipur (Rajasthan). On this day in 2020, I met a small team with big heart controlling all sales team in India and abroad in my new office. 

It was definitely not easy for me to adjust in completely new domain as at that time I was not aware of pharma industry. However, I always believe in myself and never hesitate to try new things in my life. 

Anyways, after first three months we all had a very big challenge - Corona 1st wave made us to sit at home as complete lockdown was announced. 3-4 months I have to work from home which in candid, I never enjoyed. Working in solo is not enjoyable for me. Anyways, the least affected industry during that pandemic was pharma, so I feel lucky to have in safe custody. 

However, my challenge didn't stop there. In my previous employment, I was not allowed to use social media apps during my work hours hence my phone apps typing speed was good at all. LoL. Second, I used to work on MS Office and good knowledge of advance excel usage. But in Jolly Healthcare, I started from Google Docs. than Lark Sheet and now Zoho Docs with extensive use of social media. I must say that Jolly Healthcare gives me full opportunity to learn new things and earn innovative skills. Working here in Jolly Healthcare (Le Jolly Healthcare Private Limited) is the best thing happened in my life.  

This company has taught me valuable life lessons. Things like punctuality, trust, perfection, unity, and these things are essential in life and the growth of personal as well as professional life. I have seen myself make mistakes, and sometimes I have scolded myself for them. However, I am happy that I try to work diligently and never give up. It’s a matter of great pride to see our company growing, embracing good value system and achieving more day by day. There is a set of people whom 

I would want to thank on my work anniversary from the bottom of my heart. First of all, my present and ex-employees who have worked to help this organization to the zenith of success. I take pride in saying that we have the best and extraordinary employees with equally high aspirations and dreams. They have worked against all the odds that occurred in these 3 years to make what seemed impossible, possible. Our company has become a shining example amongst the leading organization in our country that has created quality income jobs in the city. 

I would like to add few words. Companies are like families. We build them with all our heart, putting our blood and sweat into it with solely one purpose to fulfill, that is to make it grow and flourish. In a family, we take care of each other’s well-being and make sure that everything functions smoothly. Similarly, Jolly Healthcare is a family. Here, we all take care of each other, take care of the responsibilities we have so that we all, together can make our dream come true. The dream of taking our company to the list of the best companies in the country, the dream of making it a company which is known for its quality products, quality services and commitment towards work. 

Today, on this fortunate day of me completing three more successful year, I am feeling extremely proud to say that we are constantly getting closer to our bigger dreams as we make the smaller ones true, one by one. Trust is the glue that holds the relationships together and I knew I have fulfilled my promise of staying transparent with my seniors and colleagues. I promise to go on and on with all my promises and pledges. For me, trust has two parts, one is the ability to believe in others and another is being trustworthy to others. For a successful business, it is important to take both the sides together hand in hand. I have the most reliable dependable and predictable employees who are benevolent enough to put aside their self-interests. The best way to make things happen is through the deep understanding of team needs and aspirations that can be achieved by the perfect blend of demand winning performance and compassionate side for the team we are working with.

  Well, I would like to thanks especially Mr. Avish Jolly Ji, respected managing director of Jolly Healthcare (M/s Le Jolly Healthcare Private Limited) who is always supportive to me. Entrepreneur like him with such a humble personality and care for all his team members is rare to find in this world. At the time of our first meeting I was amazed to see the quantum of positive vibes in his aura. He is full of positive energy and compassion for all.

Last but not the least, I have to thank H.O. team for the immense pillar of support, they have been. Thank you for standing behind me and help me in fighting against all the odds, thick and thin, travel and travails. I have no words to express my gratitude for your relentless support. Your contribution is worth more than diamonds for me.

Feeling Blessed💚



Monday, March 25, 2019

अकेलापन

कहते हैं अकेलापन इंसान के लिए सबसे कठिन होता है।  मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसे समाज में रहना पसंद है।  लेकिन मैं अपने अकेलापन को अपना सबसे अच्छा साथी समझता हूँ।  जब मैं अकेला होता हूँ तो अपने आप को और बेहतर समझ पाता हूँ।  मैं वो कर पाता हूँ, जो मैं सदा से करना चाहता हूँ।  मैं दौड़ना चाहता हूँ, दूर बहुत दूर जहाँ मैं हूँ बस दूर-दूर तक मैं हूँ।  इस ब्रह्माण्ड के अंत तक दौड़ना चाहता हूँ।  कवी की कल्पना नहीं, कल्पना की उड़ान नहीं, सच्चाई की चमक हो जहाँ।  वहां तक दौड़ना  चाहता हूँ।  कौन हूँ मैं ? यह समझना चाहता हूँ।  अकेलापन मेरे लिए एक वरदान लेकर आता है।  जब मैं कुछ नया ढूंढता हूँ अपने अंदर।  मेरा जीवन केवल पेट भरने के लिए नहीं है, मेरे जीवन का एक उद्देश्य है जो की अकेला रहकर ही पूरा हो सकता है। समझना कठिन है और समझाना उससे भी कठिन।  समझाएं भी किसे, कोई भी तो नहीं है जो समझना चाहता है।  सब ब्यस्त हैं, अपनी दुनिया में। मकरी अपने जाल स्वयं ही बुनती है और उसी में फंसी रहती है।   यह प्रकृति अपना चक्र यूँ ही चलाती रहेगी, कोई नहीं जानता है कब तक, कहाँ तक। कर्म के हिसाब से प्रकृति अपना नियम हर किसी के लिए बना रखी है।   कर्म की अपनी व्यवस्था है, कर्म अपने कर्ता  को ढूंढ ही निकलता है।  प्रकृति का कोई धर्म नहीं, कोई जाती नहीं, कोई अंकुश नहीं। प्रकृति इन सबसे ऊपर है।   प्रकृति भी अकेली अपना काम करती है, कोई साथी, कोई दोस्त, कोई सहकर्मी की उसे आवश्यकता नहीं।  मैं  भी प्रकृति के चक्र का एक हिस्सा हूँ, जैसे अन्य जीव।  पर मैं प्रकृति को अनुभूत कर सकता हूँ। मैं प्रकृति को हर क्षण अनुभव करता हूँ।    अकेला होकर मेरा प्रयत्न यही होता है की मैं प्रकृति के चक्र से बाहर निकल सकूँ।  प्रकृति बहुत  सुन्दर है, जो भी इसे देखता है मन्त्रमुघ हो जाता है, यहीं रहना चाहता है, अपने मुलभुत उद्देश्य को भूल कर। मैंने कई बूढ़े लोगों को देखा है जो की बीमार रहते हैं पर फिर भी जीना चाहते हैं , अंग प्रत्यंग काम नहीं कर रहा होता है  फिर भी जिन्दा रहना चाहते हैं, यह शरीर छोड़ना नहीं चाहते हैं।  यह प्रकृति का सम्मोहन ही तो है।   करोड़ों  में से कोई एक मनुष्य ही अपने मुलभुत उद्देश्य को पूरा कर पाता  है। प्रकृति के चक्र को तोड़ पाता है।   बाँकी लोगों को तो यह पता भी नहीं हो पाता है।  कोई समझना भी तो नहीं चाहता है।  इस विषय को गूढ़ समझ कर लोग इससे दुरी बनाये रखते हैं।  अकेलापन किसी को अच्छा नहीं लगता है क्योंकि, जब हम अकेले होते हैं तो हमारा अंतर्मन हमें इस प्रकृति के चक्र से निकलने के लिए प्रेरित करता है, और हम इसलिए अकेला होना नहीं चाहते हैं।  यदि हमें कुछ नया करना है तो हमें अकेला होना होगा।

Sunday, July 01, 2018

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धर्म और धर्माचरण

Dharm aur Dharmacharanकल सुबह से मैं सोच रहा हूँ कि क्या हमारे सनातन समाज से धर्म और धर्माचरण समाप्त होता जा रहा है।  जहाँ विज्ञान अपने आप को साबित करा है, हर ओर  हमें वैज्ञानिक चमत्कार दिख रहा है उसके उलट सच्चे धर्माचरण वाले व्यक्तित्व ढूंढने पर भी नहीं मिलते हैं।  विज्ञान हमें हमारे जीवन को सरल बना सकता है, लेकिन धर्म के बिना वैज्ञानिक उपलब्धि हमें विनाश के ओर  ही ले जाएंगे। आज जो हर ओर  नैतिक पतन दिख रहा है उसके पीछे कहीं ना कहीं हमारे धर्म और धर्म के ठेकेदारों की विफलता नहीं तो और क्या है।  अंग्रेजी मीडियम के स्कूलों में क्रिसमस के बारे में तो अच्छी अच्छी बातें बताई जाती है किन्तु हमारे धर्म, सनातन धर्म के बारे में कितने  बच्चे पढ़ते हैं ? जब मैं इन बड़े-बड़े अंग्रेजी पब्लिक स्कूलों के नाम देखता हूँ तो आश्चर्य होता है की उनके नाम विदेशी ईसाई संतो और पादरिओं  के नाम पर रखे होते हैं और वहां पढ़ने वाले बच्चे और पढ़ाने वाले शिक्षक में  से ९९% हिन्दू होते हैं। क्या हमारे समाज और संस्कृति में संतों की कमी है! कितने पब्लिक स्कूलों में हिन्दू देवी देवताओं और संतों के बारे में पढ़ाया जाता है?
हमारे समाज में संतों और धर्मग्रंथो की कमी नहीं है।  कमी है तो सच्चे धर्माचार्यों की और धर्म को अपने जीवन में उतारने वाले मनस्वी लोगों की।  जो लोग अपने आप को धर्म का ठेकेदार मानते हैं, उन्हें समझना होगा की केवल बोलने से अगर धर्म का महत्व प्रचार प्रसार हो जाता तो कब का हो गया होता। अगर हम अपने आचरण से दूसरों को धर्म का उपदेश दें तो उसका प्रभाव ही कारगर होता है।  हमें अपने सदाचरण से दूसरों को धर्म के प्रति जागरूक करना चाहिए।  धर्म की शिक्षा को बचपन से ही देना आवश्यक होता है, अक्सर हम सुनते हैं कि  धर्म का काम तो बुढ़ापे में करना चाहिए पर एक बात हमें सोचनी चाहिए कि जब मृत्यु का कोई समय निश्चित नहीं है तो ये कैसे हो सकता है कि हम बुढ़ापे तक पहुंच सकें इसलिए जब हम  युवा हैं,जब तक हमारे हाथ में ताकत है तभी हमें धर्म कर्म के कार्य शुरू कर देने चाहिए।
आज के वातावरण में जब हर कोई पैसों के पीछे भाग रहा है, किसी के सफल और असफल का पैमाना पैसा हो गया है, धर्माचरण भी फैशन बन गया है।  जिनके पास पैसे हैं वो भंडारे लगा कर, डोनेशन देकर अपने धार्मिक होने का डंका बजाते हैं।  पर जो निर्धन हैं वो अगर धर्म की बातें करे तो लोग उस पर हँसते हैं।  और इस तरह हम समाज के पिछड़े तबके के लोगों को किसी और धर्म जैसे मुस्लिम और ईसाई में जाने का मौका देते हैं।  ऐसा नहीं है की यह नया है, इसी सब के कारण हमने अपने कितने ही सनातन धर्मालम्बी भाईओं को खो दिए और अभी भी खो रहे हैं।  अगर अब भी नहीं सम्हले तो शायद बहुत देर हो जायगी। किसी के सफल और असफल होने का पैमाना उसके सच्चे धर्माचरण और कर्म होना चाहिए ना की उसका धर्म अर्जन।
आज लोगों के नैतिक पतन का कारण  केवल और केवल धर्म के तथाकथित  ठेकेदारों (पंडितों ) के कमी का होना है। जिस तरह पदार्थों  के वैज्ञानिकों ने विज्ञान को साबित किआ है उसी तरह धर्म के पंडितों को धर्म भी अपने आचरण और उदाहरण से सिद्ध करना होगा।  तब जाकर जनमानस के नैतिक पतन को समाप्त करा जा सकता है।  

Sunday, February 18, 2018

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सहनशीलता या कायरता

हम भारतीय इतने सहनशील हो गए हैं कि कोई भी हमारे देश के विरूद्ध  कुछ भी बोल जाता है और हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बोलकर चुप रह जाते हैं।  ये एक कायर समाज की पहचान है और कहीं ना कहीं हमारा समाज भी इसी तरह का होता जा  रहा है।  सहनशीलता की भी एक तय सीमा होनी चाहिए।  अगर कोई हमारे देश के सैनिकों  को  धर्म के आधार पर बांटे या कोई पाकिस्तान परस्त  नेता खुलेआम पाकिस्तान के समर्थन में मीडिया को और आम लोगों को भड़काए  और हमारी सरकार और हम उसका विरोध भी खुलकर ना कर सकें तो समझ लो की हम एक कायर समाज के बीज बो रहे हैं। मुँझे  यह समझ में नहीं आता है कि हमारी सरकार और जो लोग सत्ता में बैठे हैं, वो ऐसे लोगों को,

Sunday, February 04, 2018

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जीवन एक पहेली

 मैंने यह पढ़ा था कि जीवन एक मायाजाल है, "ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या" इत्यादि-इत्यादि। कभी बिश्वास नहीं होता था! लेकिन यह सच है।
इसे इस तरह से समझते हैं की विज्ञान के हिसाब से अँधेरा कभी होता ही नहीं है लेकिन हमारी आखें रात के अँधेरे में देख नहीं सकती, ध्वनि भी हम एक निश्चित हर्ट्ज़ पर ही सुन सकते हैं, २० हर्ट्ज़ से लेकर २०००० हर्ट्ज़ तक।
इस संसार में कभी रात होते ही नहीं हैं। जब हमारे देश में रात हो रही होती है तो अमेरिका में सुबह हो रहे होते हैं।  इसी प्रकार के अनेक उदाहरण हैं जो यह सिद्ध करते हैं की हमारे सनातन धार्मिक ग्रन्थ में लिखे गए बातें केवल कोरी कल्पना नहीं है।

Sunday, January 28, 2018

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देश की दिशा और दशा

इस २६ जनवरी को हम सब ने बहुत ही धूम-धाम से हमारे देश का उनहत्तरवाँ गणतंत्र दिवस मनाया।  प्रातः काल से ही मैं टेलीविज़न सेट के सामने बैठ कर पुरे परेड को अच्छी तरह से देखा।  अच्छा लगा।  लेकिन शाम होते-होते मन व्यथित हो उठा।  पता है क्यों! क्योंकि हमारे ही राज्य के काशगंज जिले में  एक लड़के को केवल इसलिए मार दिया गया क्योंकि कुछ समूदाय को उसका झंडा लहराना पसंद नहीं आया।  और यूं  कहें  की उसने भारतीय तिरंगे को कुछ देश द्रोहियों  के मध्य ले जाने का साहस किया।

Sunday, January 14, 2018

कितने स्मार्ट हैं हम

आज smart phones का समय है।  हर किसी के पास, यहाँ  तक की मेरे ऑफिस के peon जिसकी मासिक वेतन केवल कुछ  रूपये है, वो भी branded company का स्मार्ट फ़ोन रखा है।  ये अच्छी बात है, हमारा देश आगे बढ़ रहा है, और यह सुचना क्रांति का युग है। लेकिन क्या हम भी स्मार्ट हैं, स्मार्ट फ़ोन्स को उपयोग करने में ? कुछ मुट्ठी भर लोगों को छोड़कर बाकीं लोगों का जबाब होगा - नहीं।  
क्या कभी हमने यह सोचा है कि हम इस स्मार्ट फ़ोन का कितना सदुपयोग कर पाते हैं। हममें  से अधिकांश लोग केवल फेसबुक, व्हाट्सप्प और इंस्टाग्राम में ही पूरा समय लगा देते हैं।  या फिर ऑनलाइन गेम्स और थोड़ी सी internet browsing कर लेते हैं।

Sunday, January 07, 2018

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मेरे विचार

 मैं एक सामान्य नागरिक हूँ।  एक साधारण सा जीवन जी रहा हूँ।  पर मेरे विचार  साधारण नहीं हैं, उसमें असाधारन  विलक्षणता है।  आज का युग भी विचारों का है।  अब युद्ध सिर्फ तलवारों से नहीं लड़े जाते हैं, उसके पीछे विचारों का बहुत बड़ा  योगदान रहता है।  उदाहरण के लिए ISIS को ही ले लो....कितना प्रचार प्रसार इस आंतकी संगठन ने सोशल मीडिया के द्वारा करा था और कर रहा भी है। 
सोशल नेटवर्किंग साइट्स अब विचारों  के आदान-प्रदान के सबसे बड़े माध्यम  बन चुके है  और इसी के द्वारा राजनैतिक से लेकर अन्य सभी  संगठन अपने-अपने हितों  को साधने में लगे रहते हैं।  
एक विशेष तरह के प्रोपेगंडा को फैला कर वामपंथी से लेकर समाज विरोधी तत्व  सोशल नेटवर्किंग साइट्स को लगातार एक हथियार की तरह प्रयोग करने लगे हैं।  जहाँ तक सोशल मीडिया का प्रश्न है तो इसकी पहुँच अब भारत के सुदूर गावों  तक हो चूका है।  अब स्मार्ट फ़ोन को खरीदने में ग्रामीण  लोग भी आगे निकल चुके हैं।  ये अच्छा भी है,  ये होना चाहिए।

Sunday, January 29, 2017

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मन की बात

आज सुबह ११ बजे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की "मन की बात" कार्यक्रम सुना । एक बात जो मन को छू गयी, वो थी मोदी जी द्वारा कहा गया एक बात की "प्रतिस्प्रधा अपने आप से करो ना की किसी और से"। मैं आज दिन भर यही सोचता रहा और इसी पर चिंतन करा को पाया की यह बात सौ फीसदी सच है दुसरो से प्रतिस्प्रधा करने पर तीन बात हो सकती है
१. अवसाद २. अहंकार और ३. अवकाश (कुछ ना करना) और यह तीनों ही स्थिति सही नहीं है। अवसाद अर्थात चिंता में हम अपने भाग्य को दोष देकर और जो है उसी में संतोष करने लगते है, जिससे आगे बढ़ना असंभव जाता है अहंकार में आने से हम अपने आप को सबसे अच्छा मान बैठते हैं तो और सब हमें तिनके के सामान लगते हैं और

Tuesday, January 13, 2015

जीवन का लक्ष्य‍‍‍।



महर्षि याज्ञवलक्य अपनी समस्त संपत्ति को दोनों पत्नियों में बराबर बाँट कर गृह त्याग के लिए उद्यत हुए । मैत्रेयी को संतोष नहीं हुआ और वह आखिर पूछ ही बैठी " भगवन ! क्या मैं इस सब को लेकर जीवन मुक्ति का लाभ प्राप्त कर सकुंगी ? " क्या मैं मर जाउंगी ? आत्मसंतोष प्राप्त कर सकुंगी ? महर्षि ने अपने चिंतन का क्रम तोड़ते हुए कहा - " नहीं । ऐसा नहीं हो सकेगा । साधन सुविधा संपन्न सुखी जीवन जैसा तुम्हारा अब तक रहा उसी तरह आगे भी चलता रहेगा, अन्य सांसारिक लोगों की तरह ही तुम भी अपना जीवन सुख सुविधा के साथ बिता सकोगी । " मैत्रेयी का असंतोष दूर ना हुआ, और वो बोली " येणाह नामरताँ स्याम किमहं तेन कुर्याम् । " जिससे मुँझे अमृतत्व की प्राप्ति ना हो, उसे लेकर मैं क्या करुँगी? देव ! मुँझे यह सुख - सुविधा संपन्न सांसारिक जीवन नहीं चाहिए ।
Moksha