हम दीपावली पर घर में मिठाई लाते हैं, मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाते हैं और बच्चों को अच्छे पकवान खिलाते हैं। लेकिन जब खाने की चीजों की शुद्धता पर ही सवाल उठने लगें, तो आम आदमी भरोसा किस पर करे?
भारत में त्योहार केवल छुट्टियाँ मनाने का अवसर नहीं होते। हमारे यहाँ त्योहारों का अर्थ है परिवार, परंपरा, पूजा-पाठ, पकवान, मिठाइयाँ और अपनों के साथ खुशियाँ बाँटना।
दीपावली आने वाली है। बाजार सज चुके हैं। मिठाई की दुकानों पर रौनक है। घरों में पकवान बनाने की तैयारियाँ चल रही हैं। कहीं बेसन के लड्डू बनेंगे, कहीं काजू कतली आएगी, कहीं मंदिर में घी का दीपक जलेगा।
लेकिन इसी त्योहार से पहले राजस्थान से आई कुछ खबरों ने मन में एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।
क्या अब हम अपने ही घर में लाई गई मिठाई, मावा और घी पर भी आँख बंद करके भरोसा नहीं कर सकते?
राजस्थान में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई ने चौंकाया
3 नवंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, बीकानेर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने जयपुर की केंद्रीय टीम के साथ मिलकर बड़ी कार्रवाई की।
इस कार्रवाई में लगभग 28 हजार किलो दूषित मैदा सीज किया गया। इसके अलावा 400 किलो फफूंद लगा मावा, 309 किलो सड़े-गले बादाम, पिस्ता और अखरोट, 90 किलो खराब गुलाब जामुन तथा अन्य अवधिपार खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई।
विभाग ने जाँच रिपोर्ट आने तक लगभग 22,750 लीटर खाद्य तेल और 2,319 लीटर घी भी सीज किया। रिपोर्ट के अनुसार, 100 से अधिक खाद्य नमूने जाँच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा चुके हैं।
अब जरा सोचिए, यदि त्योहारों के समय बाजार में ऐसी सामग्री पहुँच जाती, तो कितने परिवारों की सेहत प्रभावित हो सकती थी?
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खराब या दूषित खाद्य पदार्थ केवल किसी एक व्यक्ति की परेशानी नहीं होते। वे बच्चों, बुजुर्गों और पूरे परिवार के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं।
श्रीगंगानगर में 22 हजार लीटर से अधिक संदिग्ध घी जब्त
इसी बीच श्रीगंगानगर जिले से भी एक गंभीर खबर सामने आई।
पुलिस के अनुसार, सीआईडी क्राइम ब्रांच, स्थानीय पुलिस और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की संयुक्त टीम ने दो प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करते हुए कुल 22,138 लीटर संदिग्ध घी जब्त किया। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 1.60 करोड़ रुपये बताई गई। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में कथित तौर पर यह बात सामने आई कि एक्सपायर और वापस आए घी को नई पैकिंग और लेबल लगाकर बाजार में बेचने की आशंका थी। पाम ऑयल और वनस्पति से घी तैयार किए जाने की भी जाँच की जा रही है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे हैं। अंतिम निष्कर्ष जाँच रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
लेकिन इस खबर ने उपभोक्ताओं के मन में एक स्वाभाविक सवाल जरूर पैदा किया है।
जिस घी को हम शुद्ध मानकर अपने बच्चों को खिलाते हैं, पूजा में इस्तेमाल करते हैं और अपने घर की रसोई का हिस्सा बनाते हैं, उसकी असलियत कौन सुनिश्चित करेगा?
यह सिर्फ मिलावट नहीं, भरोसे के साथ धोखा है
मुझे सबसे अधिक चिंता उस आम परिवार की होती है जो अपनी सीमित कमाई में से त्योहार पर कुछ अच्छा खरीदना चाहता है।
एक पिता मिठाई का डिब्बा घर लाता है ताकि बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आए।
एक माँ अच्छे घी में बच्चों के लिए पकवान बनाती है।
कोई परिवार मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के लिए घी खरीदता है।
किसी घर में मेहमान आने वाले हैं, इसलिए बाजार से मावा और मिठाई लाई जाती है।
इन सभी लोगों की एक ही अपेक्षा होती है—जो पैसा दिया है, उसके बदले खाने योग्य और सुरक्षित सामान मिले।
लेकिन यदि कोई कारोबारी जानबूझकर खराब, एक्सपायर या मिलावटी खाद्य सामग्री बेचता है, तो वह सिर्फ किसी उत्पाद की गुणवत्ता से समझौता नहीं करता।
वह ग्राहक के विश्वास के साथ खिलवाड़ करता है।
मुनाफा कमाना व्यापार है, लेकिन किसी की सेहत को दाँव पर लगाकर मुनाफा कमाना व्यापार नहीं, गंभीर सामाजिक अपराध है।
हमारी परंपराओं में शुद्धता का महत्व केवल दिखावे के लिए नहीं
हमारी सनातन परंपरा में भोजन और शुद्धता का विशेष महत्व रहा है।
पूजा में भोग लगाया जाता है। मंदिरों में प्रसाद चढ़ता है। घरों में त्योहारों पर पकवान बनते हैं। दीपावली पर घी का दीपक जलाना भी अनेक परिवारों की परंपरा है।
हम भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं मानते, बल्कि उसे परिवार, संस्कृति और आस्था से भी जोड़कर देखते हैं।
ऐसे में यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर दूषित मावा, खराब घी या मिलावटी सामग्री बेचता है, तो वह केवल ग्राहक के साथ धोखा नहीं करता। वह उन भावनाओं का भी अपमान करता है जिनके साथ लोग भोजन और प्रसाद को जोड़ते हैं।
मेरे विचार से जिस व्यवसाय में लोगों के भोजन और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी जुड़ी हो, वहाँ नैतिकता का स्तर और भी ऊँचा होना चाहिए।
खासकर तब, जब त्योहारों पर बच्चों और परिवारों के लिए बड़ी मात्रा में मिठाइयाँ और खाद्य सामग्री खरीदी जाती हैं।
सरकार की कार्रवाई जरूरी है, लेकिन क्या केवल छापेमारी पर्याप्त है?
मैं राजस्थान सरकार और खाद्य सुरक्षा विभाग की ऐसी कार्रवाइयों का स्वागत करता हूँ।
त्योहारों से पहले बाजारों में जाँच होना आवश्यक है। संदिग्ध खाद्य सामग्री को सीज करना, खराब सामान को नष्ट कराना और आवश्यक होने पर गिरफ्तारियाँ करना सही दिशा में उठाए गए कदम हैं।
लेकिन मैं एक बात स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूँ—
मिलावट के खिलाफ अभियान केवल त्योहारों तक सीमित नहीं होना चाहिए।
दीपावली के समय छापेमारी होगी और उसके बाद सब सामान्य हो जाएगा, तो समस्या खत्म नहीं होगी।
जरूरत है ऐसी स्थायी व्यवस्था की जिसमें:
खाद्य सामग्री बनाने वाली इकाइयों की नियमित जाँच हो।
दूध, मावा, घी, तेल, मिठाई और मसालों के नमूनों की नियमित प्रयोगशाला जाँच हो।
एक्सपायर खाद्य पदार्थों की री-पैकिंग और गलत लेबलिंग पर सख्त कार्रवाई हो।
दोष सिद्ध होने पर संबंधित कानून के अनुसार उचित दंड दिया जाए।
मिलावट का कारोबार दोबारा शुरू न हो, इसके लिए निगरानी और कार्रवाई जारी रहे।
उपभोक्ताओं की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो और कार्रवाई का परिणाम भी सार्वजनिक किया जाए।
सिर्फ सामान जब्त करना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि वह सामान बाजार में कैसे आया, किसके माध्यम से पहुँचा और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए क्या सुधार किए गए।
ग्राहक भी थोड़ी सावधानी बरतें
सरकार और विभागों की जिम्मेदारी अपनी जगह है, लेकिन एक जागरूक ग्राहक के रूप में हमें भी कुछ सावधानियाँ रखनी चाहिए।
पहली बात: जहाँ तक संभव हो, खाद्य पदार्थ विश्वसनीय दुकानों और प्रतिष्ठित विक्रेताओं से खरीदें।
दूसरी बात: पैक्ड खाद्य सामग्री खरीदते समय पैकेट की सील, निर्माण और समाप्ति तिथि, बैच नंबर तथा निर्माता की जानकारी जरूर देखें।
तीसरी बात: पैक्ड उत्पाद पर FSSAI लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन नंबर की जानकारी जाँचें। केवल आकर्षक पैकेजिंग देखकर किसी उत्पाद को शुद्ध न मानें।
चौथी बात: बहुत कम कीमत पर मिलने वाले घी, मिठाई या अन्य खाद्य पदार्थों को लेकर सतर्क रहें। असामान्य रूप से कम कीमत अपने आप में मिलावट का प्रमाण नहीं है, लेकिन अतिरिक्त जाँच की वजह जरूर हो सकती है।
पाँचवीं बात: मिठाई, मावा और दूध से बने उत्पादों की ताजगी, साफ-सफाई और सुरक्षित भंडारण पर ध्यान दें।
छठी बात: खरीदारी का बिल और पैकेजिंग संभालकर रखें। कोई खाद्य पदार्थ संदिग्ध लगे तो उसकी तस्वीर, बिल और पैकेट की जानकारी के साथ शिकायत करें।
एक और महत्वपूर्ण बात—सोशल मीडिया पर चलने वाले घरेलू परीक्षणों को शुद्धता का अंतिम प्रमाण न मानें। खाद्य पदार्थ की असली गुणवत्ता की पुष्टि उचित प्रयोगशाला जाँच से ही हो सकती है।
शिकायत कहाँ करें?
बहुत से लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि खाद्य पदार्थ में मिलावट, खराब गुणवत्ता, गलत लेबलिंग या असुरक्षित खाद्य सामग्री की शिकायत कहाँ की जाए।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने उपभोक्ताओं के लिए Food Safety Connect पोर्टल और मोबाइल ऐप की सुविधा दी है।
इसके माध्यम से उपभोक्ता खाद्य सुरक्षा से जुड़ी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन की प्रामाणिकता भी जाँच सकते हैं।
आधिकारिक वेबसाइट:
https://foscos.fssai.gov.in/consumergrievance/
हमें केवल शिकायत करने की नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की भी जरूरत है।
मेरी बात, मेरी सोच
मैं यह नहीं कहता कि बाजार में बिकने वाली हर मिठाई मिलावटी है या हर दुकानदार गलत काम कर रहा है।
आज भी बहुत से ईमानदार कारोबारी हैं जो वर्षों से अपनी मेहनत और विश्वास के बल पर व्यापार कर रहे हैं। ऐसे लोगों का सम्मान होना चाहिए।
लेकिन कुछ लोगों के लालच के कारण पूरे व्यापार और खाद्य व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
मेरा सवाल उन लोगों से है जो जानबूझकर खराब और संदिग्ध खाद्य सामग्री को नया रूप देकर बाजार में पहुँचाने की कोशिश करते हैं।
क्या कुछ लाख या करोड़ रुपये का मुनाफा किसी बच्चे की सेहत से बड़ा हो गया है?
क्या दीपावली की मिठाई में भी अब ईमानदारी की गारंटी नहीं बची?
क्या लोगों की आस्था, उनकी खुशियाँ और उनके परिवार का स्वास्थ्य किसी के लिए केवल व्यापार का अवसर बनकर रह गया है?
मैं सरकार से आग्रह करता हूँ कि त्योहारों पर खाद्य सुरक्षा अभियान को गंभीरता से चलाया जाए और दोष सिद्ध होने पर किसी भी व्यक्ति को केवल प्रभावशाली होने या बड़े कारोबारी होने के कारण राहत न मिले।
साथ ही, आम नागरिकों से भी अपील है कि सस्ता सामान खरीदने की जल्दबाजी में गुणवत्ता और सुरक्षा को नजरअंदाज न करें।
इस दीपावली पर घर में दीपक जरूर जलाएँ, बच्चों को मिठाई भी खिलाएँ, मंदिर में प्रसाद भी चढ़ाएँ और खुशियाँ भी मनाएँ।
लेकिन एक बात याद रखिए—
त्योहार की असली मिठास मिठाई के डिब्बे में नहीं, बल्कि उस विश्वास में होती है कि हम अपने परिवार को जो खिला रहे हैं, वह सुरक्षित है।
हमारे घरों में रोशनी हो, रसोई में शुद्धता हो, व्यापार में ईमानदारी हो और बाजार में ग्राहक का विश्वास बना रहे।
क्योंकि जिस समाज में भोजन की शुद्धता और व्यापार की ईमानदारी खत्म होने लगे, वहाँ केवल त्योहारों की सजावट बचती है, उनकी असली मिठास नहीं।
इस दीपावली हमारी यही कामना हो—
हर घर में खुशियाँ आएँ, हर थाली में सुरक्षित भोजन हो और हर व्यापारी अपने मुनाफे से पहले इंसानियत को महत्व दे।
मिलावट के खिलाफ आवाज उठाइए। शुद्धता को आदत बनाइए। और ईमानदार व्यापार को प्रोत्साहन दीजिए।
शुभ दीपावली! 🪔
जय श्री राम! 🙏
— देव वैदिक
मेरी सोच… मेरे शब्द… हमारी सनातन संस्कृति और एक जागरूक समाज के लिए…
